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अशरफ़ का करम है मुझ पे मेरे / Ashraf Ka Karam Hai Mujh Pe Mere

दिल जो बना मेरा चिश्ती हरम अशरफ़ का करम है मुझ पे मेरे आप का रौज़ा कितना 'आली आप के दर की शान निराली रौज़ा तुम्हारा है बाग़-ए-इरम अशरफ़ का करम है मुझ पे मेरे अशरफ़ का करम है मुझ पे मेरे जो भी दर पे आए तुम्हारे ख़ाली झोली भर के जाए बड़ा सख़ी देखो मेरा सनम अशरफ़ का करम है मुझ पे मेरे अशरफ़ का करम है मुझ पे मेरे मौला 'अली की आँख के तारे ग़ौस-ए-आ'ज़म के हैं दुलारे तुम पे फ़िदा, आक़ा ! 'अरब-ओ-'अजम अशरफ़ का करम है मुझ पे मेरे अशरफ़ का करम है मुझ पे मेरे नाज़ करे अशरफ़ का दीवाना पाया है कितना पाक घराना ये तो हमारा है दीन-ओ-धरम अशरफ़ का करम है मुझ पे मेरे अशरफ़ का करम है मुझ पे मेरे शान से कहता है ये निज़ामी पाई जो तेरे दर की ग़ुलामी तेरी ग़ुलामी है रब का करम अशरफ़ का करम है मुझ पे मेरे अशरफ़ का करम है मुझ पे मेरे ना'त-ख़्वाँ: आ'ज़म रज़ा तहसीनी हाफ़िज़ कामरान क़ादरी dil jo bana mera chishti haram ashraf ka karam hai mujh pe mere aap ka rauza kitna 'aali aap ke dar ki shaan niraali rauza tumhaara hai baaG-e-iram ashraf ka karam hai mujh pe m...

नबी के रौज़े को चूम लूँगा कभी इधर से कभी उधर से / Nabi Ke Rauze Ko Choom Loonga Kabhi Idhar Se Kabhi Udhar Se

नबी के रौज़े को चूम लूँगा, कभी इधर से, कभी उधर से तो मुझ पे साया करम का होगा, कभी इधर से, कभी उधर से नबी के रौज़े को चूम लूँगा, कभी इधर से, कभी उधर से बहेगा मुझ पर करम का दरिया, कभी इधर से, कभी उधर से करूँगा मैं जब तवाफ़-ए-का'बा, तो वो दिखाएँगे अपना जल्वा नबी का दीदार मैं करूँगा, कभी इधर से, कभी उधर से हबीब-ए-दावर शफ़ी'-ए-महशर, वो जब पिलाएँगे आब-ए-कौसर मैं उन के हाथों से जाम लूँगा, कभी इधर से, कभी उधर से रुख़-ए-जुनूबी, रुख़-ए-शुमाली में होंगे दोनों तरफ़ सुवाली मैं उन से दिल की मुराद लूँगा, कभी इधर से, कभी उधर से उधर हो का'बा इधर मदीना, ये होगा, 'अंबर ! मेरा क़रीना मैं भीक दोनों तरफ़ से लूँगा, कभी इधर से, कभी उधर से बुलाएँगे जब मदीने वाले, करम की ख़ैरात फिर मैं लेने बढ़ूँगा फिर अपने दिल को थामे, कभी इधर से, कभी उधर से जहाँ में ना'तें मैं पढ़ रहा हूँ, करम है मुझ पर ये मुस्तफ़ा का जो सब की बिगड़ी बना रहे हैं, कभी इधर से, कभी उधर से ना'त-ख़्वाँ: ग़ुलाम साबिर और ग़ुलाम वारिस हाफ़िज़ कामरान क़ादरी लाइबा फ़ातिमा nabi ke rauze ko choom loonga, kabhi idha...

कोई मंसूर कोई बन के ग़ज़ाली आए / Koi Mansoor Koi Ban Ke Ghazali Aae

कोई मंसूर, कोई बन के ग़ज़ाली आए उन के दरबार से हो कर जो सवाली आए हो मेरे बस में तो मैं दिल में बिठा लूँ उन को चूम कर जो मेरे सरकार की जाली आए उन की रहमत को तो ये बात गवारा ही नहीं उन की चौखट पे कोई जाए तो ख़ाली आए उन के अल्ताफ़-ओ-करम बढ़ के ख़रीदेंगे उन्हें आज भी ले के कोई ज़ौक़-ए-बिलाली आए उन का जल्वा तो है मौजूद यहाँ भी लेकिन कोई ले कर तो नज़र देखने वाली आए आँख खोलूँ तो नज़र गुंबद-ए-ख़ज़रा पे पड़े दिल में झाँकूँ तो नज़र जल्वा-ए-'आली आए ना'त-ख़्वाँ: क़ारी शाहिद महमूद क़ादरी हाफ़िज़ कामरान क़ादरी koi mansoor, koi ban ke gazaali aae un ke darbaar se ho kar jo sawaali aae ho mere bas me.n to mai.n dil me.n biTha lu.n un ko choom kar jo mere sarkaar ki jaali aae un ki rahmat ko to ye baat gawaara hi nahi.n un ki chaukhaT pe koi jaae to KHaali aae un ke altaaf-o-karam ba.Dh ke KHareedenge unhe.n aaj bhi le ke koi zauq-e-bilaali aae un ka jalwa to hai maujood yaha.n bhi lekin koi le kar to nazar dekhne waali aae aankh kholu.n to nazar gumbad-e-KHazra pe pa.De di...

इतना काफ़ी है ज़िंदगी के लिए / Itna Kafi Hai Zindagi Ke Liye

इतना काफ़ी है ज़िंदगी के लिए रख लें आक़ा जो नौकरी के लिए इतना काफ़ी है ज़िंदगी के लिए माह-ओ-ख़ुर्शीद उन की चौखट पर रोज़ आते हैं रौशनी के लिए इतना काफ़ी है ज़िंदगी के लिए चाँद-तारे भी उन के क़दमों में रोज़ आते हैं रौशनी के लिए इतना काफ़ी है ज़िंदगी के लिए दोनों 'आलम बनाए मौला ने या नबी ! सिर्फ़ आप ही के लिए इतना काफ़ी है ज़िंदगी के लिए तक के उन को अय्यूब के घर में महल तरसे हैं झोंपड़ी के लिए इतना काफ़ी है ज़िंदगी के लिए आ गए क़ब्र में भी छुड़वाने दर्द कितना है उम्मती के लिए इतना काफ़ी है ज़िंदगी के लिए लंबे सज्दे किये नबी ने, कहा ऐ नवासे ! तेरी ख़ुशी के लिए इतना काफ़ी है ज़िंदगी के लिए दीद माँगी है उन की, ऐ हाकिम ! मैं ने बस वक़्त-ए-आख़री के लिए शायर: अहमद अली हाकिम ना'त-ख़्वाँ: अहमद अली हाकिम हाफ़िज़ कामरान क़ादरी क़ारी शाहिद महमूद क़ादरी itna kaafi hai zindagi ke liye rakh le.n aaqa jo naukari ke liye itna kaafi hai zindagi ke liye maah-o-KHurshid un ki chaukhaT par roz aate hai.n raushani ke liye itna kaafi hai zindagi ke liye chaand-taare bhi un ke qadmo....

हम ने आँखों से देखा नहीं है मगर उन की तस्वीर सीने में मौजूद है / Hum Ne Aankhon Se Dekha Nahin Hai Magar Unki Tasweer Seene Mein Maujood Hai

Hum Ne Aankhon Se Dekha Nahin Hai Magar Lyrics in Hindi & English हम ने आँखों से देखा नहीं है मगर उन की तस्वीर सीने में मौजूद है जिस ने ला कर कलाम-ए-इलाही दिया वो मुहम्मद मदीने में मौजूद है हम ने आँखों से देखा नहीं है मगर उन का जल्वा तो सीने में मौजूद है जिस ने ला कर कलाम-ए-इलाही दिया वो मुहम्मद मदीने में मौजूद है फूल खिलते हैं पढ़ पढ़ के सल्ले-'अला झूम कर कह रही है ये बाद-ए-सबा ऐसी ख़ुश्बू चमन के गुलों में कहाँ ! जो नबी के पसीने में मौजूद है हम ने माना कि जन्नत बहुत है हसीं छोड़ कर हम मदीना न जाएँ कहीं यूँ तो जन्नत में सब है मदीना नहीं और जन्नत मदीने में मौजूद है छोड़ना तेरा तयबा गवारा नहीं सारी दुनिया में ऐसा नज़ारा नहीं ऐसा मंज़र ज़माने में देखा नहीं जैसा मंज़र मदीने में मौजूद है ना'त-ख़्वाँ: महमूद जे. हाफ़िज़ कामरान क़ादरी अलीशा कियानी ham ne aankho.n se dekha nahin hai magar un ki tasweer seene me.n maujood hai jis ne laa kar kalaam-e-ilaahi diya wo muhammad madine me.n maujood hai ham ne aankho.n se dekha nahin hai magar un ka jalwa to see...